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पति होना धर्मपरायण होना है। लेकिन ज़्यादातर लोग इसे सिर्फ़ पत्नियों तक ही सीमित रखते हैं। उनका मानना है कि सिर्फ पत्नियों को ही धर्म परायण होना चाहिए। हालांकि पति होने के साथ उनकी मानवता का ग्राफ़ कभी-कभी इतना नीचे चला जाता है कि उनको इसका अंदाज़ा तक नहीं रहता है। तो आज हम आपको पतियों के इसी ग्राफ़ से परिचित कराएंगे।
पत्नियों को नीचा दिखाते हैं तो..
महज चंद सुविधाएं पत्नी को उपलब्ध कराकर कुछ लोग समझते हैं कि उससे बेहतर पति दुनिया में अन्य कोई नहीं और इनके लिए वह निरंतर पत्नी को ताने दे कर अहसान जताता है। पत्नियों को नीचा दिखाने की मानसिकता रखने वाले ऐसे लोग समाज के लिए अभिशाप होते हैं।
निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति परिवार और समाज में नकारात्मकता का ही प्रसार करते हैं। चूंकि वह स्वयं को छोड़कर शेष के प्रति नकार और विरोध के भाव से ही सदैव भरे रहते हैं, इसलिए न वे स्वयं कभी सुखी रहते हैं और ना कभी दूसरों को सुकून में रहने देते हैं।
पत्नियों को होते हैं ये नुकसान
इस तनाव भरी ज़िंदगी को जीते-जीते पत्नी की सारी प्रतिभाएँ कुंठित हो जाती है। वह बाहर से ख़ुश और सुंदर तो नज़र आती है, लेकिन भीतर से वह बिल्कुल खोखली हो चुकी होती है। ऐसे में पत्नियों को औसत आयु तक घट जाती है। कभी-कभी तो पत्नियाँ अवसाद में आकर आत्महत्या तक भी कर लेती हैं।
ऐसे करें अपना ग्राफ़ ऊपर
इंसान में कम-अधिक मात्रा में गुण और अवगुण दोनों होते हैं। बेहतर इंसान वही है, जो दूसरों को प्रेम देना और सम्मान करना जानता हो। इसके अलावा जो अपने अवगुणों को स्वीकार कर उनमें सुधार की इच्छा रखता हो वह इंसान सबसे महान है। वास्तव में यह आत्म-स्वीकृति और इच्छा ही आपको बेहतर इंसान बनाती है।
अगर आपको बेहतर पति होना है तो आपको अपने परिवार की फीलिंग भी समझनी होगी। पत्नी को भी आपको समान समझना होगा, तभी आपके घर में सत्ती ख़ुशियाँ आयेंगी और असल में आपके पति होने का ग्राफ़ बहुत ऊपर जायेगा।
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