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खड़े होकर पेशाब करना कई लोगों का शगल है। ज़्यादातर लोगों को तो बचपन से ही इसकी आदत पड़ी है। लेकिन शायद जितने भी लोग खड़े होकर पेशाब करते हैं, उनमें से ज़्यादातर लोगों को इसके नुकसान के बारे में पता ही नहीं है।
क्या हुआ..? हमें पता है कि आपको ऐसा सुनकर बड़ी हैरानी हो रही होगी कि खड़े होकर पेशाब करने के भी नुकसान होते हैं। जी हाँ, बिल्कुल होते हैं। वास्तव में खड़े होकर पेशाब करना अपने स्वास्थ्य के साथ भारी नुकसान करने जैसा होता है। इससे होने वाले नुकसानों के कारण आप काफी परेशान हो सकते हैं।
तो आइए जानते हैं इसके नुकसान के बारे में-
खड़े होकर पेशाब करना यूरिनेशन (मूत्र-विसर्जन) की बिल्कुल ही ग़लत पोज़ीशन है। ऐसा करने का सही तरीक़ा बैठकर यूरिनेशन करना ही है।
हमारी भारतीय सभ्यता के सभी पहनावे पोषण की सभी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखकर ही चुने गये हैं। इसमें पेशाब करने के सही तरीक़े को भी ध्यान में रखा गया है। इसीलिए सभी भारतीय पहनावे यूरिनेशन फ़्रेण्डली हैं।
खड़े होकर पेशाब करने से मूत्राशय पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता है, जिससे बचा हुआ यूरिन (पेशाब) वापस फिर से किडनी की तरफ लौट जाता है। इससे किडनी में निगेटिव इफ़ेक्ट्स आ जाते हैं, जिसके कारण कई बार किडनी में इंफ़ेक्शन भी हो जाते हैं।
यदि आप खड़े होकर पेशाब करते हैं तो इससे रीढ़ ही हड्डी पर काफी नुकसानदेह प्रभाव पड़ता है। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी भी कमज़ोर हो जाती है।
जब आप खड़े होकर पेशाब करते हैं तो पेशाब की कई छीटें आपके पैरों पर भी आती हैं, जिसके चलते नकारात्मक ऊर्जा स्वाभाविक रूप से आपकी तरफ़ आकर्षित होने लगती है। इस प्रक्रिया के लगातार दोहराने पर आप निगेटिव एनर्जी से भर चुके होते हैं। इसलिए ये माना जाना चाहिए कि खड़े होकर पेशाब करना निगेटिविटी को अपने भीतर भर ही लेना है।
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