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कुत्ता पालने की परम्परा भारत में कबीलाई सभ्यता से रही है। प्राचीन और मध्‍य काल में लोग अपने साथ कुत्ते को इसलिए रखते थे, ताकि वे जंगली जानवरों, लुटेरों और भूत इत्यादि से बच सके। बंजारा लोग भी कुत्ते को इसलिए पालते थे, ताकि वे हर तरह के ख़तरे से पहले ही सतर्क हो जाएं। भारत में जंगल में रहने वाले साधु-संत भी कुत्ता पालते थे, ताकि कुत्ता उनको खतरे के प्रति सतर्क कर दे। इसी परम्परा की बदौलत आजकल भी लोग अपने घरों में कुत्ता पाल रहे हैं।
आइए आपको बताते हैं घरों में कुत्ता पालने के लाभ के बारे में...
कुत्ते को भगवान शंकर के अंश भैरव महाराज का सेवक माना जाता है। कुत्ते को भोजन देने से भैरव प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि कुत्ता हर तरह के आकस्मिक संकटों से परिचित रहता है जिससे हमारी रक्षा होती है। मान्यता है कि कुत्ते को प्रसन्न रखने से वह आपके आसपास यमदूत को भी नहीं फटकने देता है। कुत्ते को देखकर हर तरह की बुरी आत्माएँ दूर भागने लगती हैं।
सबसे श्रेष्ठ काला कुत्ता तथा काले व सफेद रंग का मिश्रित (चितकबरा) कुत्ता अच्छा माना जाता है। कुत्ता केतु राशि की शुभता के लिए पाला जाता है।
कुत्ता एक ऐसा जीव है जो भविष्य में होने वाली घटनाओं और सूक्ष्म जगत (ईथर माध्यम) की आत्माओं को महसूसकर देखने की क्षमता रखता है। कुत्ता कई किलोमीटर दूर तक की गंध सूँघ सकता है।
इन सब गुणों के कारण वह हमें संकेत के माध्यम से ऐसी घटनाओं की सूचना दे देता है और हम समय पर बचाव का इंतज़ाम कर लेते हैं।
कुत्ता एक वफादार जीव भी होता है। यह आपको प्रोटेक्ट करने का हर सम्भव प्रयास करता है।
कुत्ते में अपनेपन का भाव होता है, इसलिए इसकी संगत में रह रहे लोगों में आत्मीयता का भाव पैदा होता है।
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