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तनाव और क्रिएटिविटी के बीच एक गहरा संबंध है। डेनमार्क के एक विश्वविद्यालय ने हालिया एक स्टडी में पाया है कि डिप्रेशन दोनों एक दूसरे के साथ चलती है। ये स्टडी कहती है कि दुख और तनाव इंसान को और भी ज्यादा क्रिएटिव बनाता है।
हम किसी का भी नाम ले लें, अर्नेस्ट हेमिंगवे, रॉबिन विलियम्स, रॉय रेमंड कितने भी बड़े उद्योगपति या सफल व्यक्ति क्यों ना हो, सबकी जिंदगी तनाव भरी रही है। हर किसी को जीवन में बहुत ग़म मिला है, लेकिन आज वे सबसे ज्यादा सफल हैं। इस दुनिया ने उन्हें बहुत दुख दिया है, लेकिन वे इस दुख से हारे नहीं, बल्कि इसी को अपनी सफलता की सीढ़ी बनाई।
एक सॉफ्टवेयर है जो आपके डिप्रेशन लेवर और आपके क्रिएटिव लेवल की जांच करता है कि कब आप पॉजिटिव हैं और कब नेगेटिव। कब हम कुछ क्रिएट करने की क्षमता रखते हैं और कब हम कुछ करने में असफल होते हैं।
दरअसल, जब हम दुखी या तनाव में होते हैं तभी हमें अपनी ऊर्जा और शक्ति का एहसास होता है और हम मेहनत करके अपने अंदर छिपी सबसे बेस्ट क्वालिटी बाहर निकाल पाते हैं। इसलिए अब आप जब भी तनाव में रहें तो उसके कारण बाहर आने वाली एनंर्जी को क्रिएटिविटी में बदलने का प्रयास करें।
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