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आए दिन टीवी व इंटरनेट पर हम इस तरह के कई कलयुगी बेटों की कहानी देखते व सुनते आते हैं, जो अपनी मां से छुटकारा पाने के लिए किस हद तक नहीं गुजर जाते। लेकिन जो खबर हम आज आपको देने जा रहे हैं, यह कोई कलयुगी बेटे की कहानी नहीं बल्कि गरीबी से लाचार एक बेटे की दास्तां है।
वो कहते है न गरीबी इंसान को क्या-क्या दिन नहीं दिखाती, गरीबी इंसान को इतना लाचार कर देती है कि ऊपर वाले के अलावा उसकी सहायता के लिए और कोई आगे नहीं आता।
यह कहानी है अहमदाबाद पंचमहाल जिले के घोघंबा तहसील के राजगढ़ गांव के गुलाब चौहान नाम के शख्स की। गुलाब राज्य परिवहन निगम में ड्राइवर का काम करता है। गुलाब की मां पिछले काफी समय से शुगर की बीमारी से पीड़ित है।
शुगर के साथ गुलाब की मां के पैर में गैगरीन हो गया था, घाव काफी समय से ठीक नहीं हो रहा था। गुलाब इसके लिए डॉक्टर के पास गया, तो उन्होंने बताया कि उनकी मां का पैर काटा जाएगा। इस ऑपरेशन में काफी पैसे लगने वाले थे, अब-तक गुलाब की मां के इलाज में काफी खर्च हो चुका था।
ऑपरेशन के लिए गुलाब के पास पैसे नहीं बचे थे....पैसे न होने की स्थिति में गुलाब ने निर्णय लिया कि वह यह ऑपरेशन खुद घर पर करेगा। इसके लिए उसने सारा ऑपरेशन का सामान घर पर मंगवा लिया। इस काम के लिए गुलाब ने अपनी दोनों बहनो को भी बुलवा लिया।
तीनों ने मिलकर अपनी बुढ़ी मां का पैर घर पर ही काट दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह ऑपरेशन सफल रहा, आज उनकी मां बिल्कुल ठीक है और उनकी सेहत में भी काफी सुधार है।
गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने प्रायोगिक तौर पर राजधानी गांधीनगर में वरिष्ठ नागरिकों को केवल 1000 रुपए में घर-बैठे विविध परीक्षणों सहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसी का फायदा गुलाब चौहान ने उठाया।
लेकिन, इस खबर से समाज की यह भी सच्चाई सामने आती है कि आज के समय में भी बड़े शहरों में कई ऐसी जगहें हैं जहां लोग की हालात आज भी काफी गंभीर है। लोगों के पास अपने परीजनों के इलाज के लिए पैसे नहीं, जिसकी वजह से उन्हें इस तरह के कदम उठाने पड़ जाते हैं।
खैर! इस केस में तो गुलाब चौहान का लक उनके साथ था, इसलिए उनकी मां आज बिल्कुल ठीक है लेकिन हर किसी का लक इतना अच्छा नहीं होता।
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